namaz padhne ka tarika, Namaz rakat, वज़ू का सही तरीका

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namaz padhne ka tarika, Namaz rakat, वज़ू का सही तरीका  – दोस्तो अगर आप एक मुसलिम धर्म से है तो आपको Namaz के बारे मे तो पतई होगा, Namaz पढ़ना हमारे muslim धर्म मे एक सबसे अहम हिस्सा माना जाता है, क्योकि हमारे धर्म के अंदर नमाज पढ़ना जरूरी है, चाहे वो बीमार की ना हो, क्योकि हमारी सबसे पहली पहचान नामज है,

मे आपको बता दु की नमाज हम सभी के पास आती होगी लेकिन हमे उसका सही तरीका नही पता है, नमाज का सही तरीका किया है, जेसे की नियत केसे करते है, वज़ू केसे करते है, ओर Namaz के अंदर किया किया पढ़ा जाता है,

अगर आपको Namaz के सही तरीका जानना है, तो आप हमारी इस पोस्ट को जरूर पढे ताकि आपको नमाज पढ़ने मे कोई परेशानी नो हो,

अगर हम गलत Namaz पढ़ते है| हमारी Namaz एक कच्चा मकान की तरहे है, जो कभी भी गिर सकती है,

अब हम जनेगे की नमाज के लिए वज़ू केसे बनाते है, ओर साथी इन 5 वक्त की Namaz के अंदर कितनी rakat होती है, ओर कितनी सुन्नत होती है, सबसे पहले जनेगे वज़ू केसे बनाते है,

Namaz के लिए वज़ू केसे बनाते है,

namaz padhne ka tarika
namaz padhne ka tarika

वज़ू करने का सही तरीका:-

1. नीयत करने और बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम पढने के बाद

2. मिस्वाक को धोकर तीन बार ऊपर-नीचे के दाँतों में तीन नये पानी से इस्तेमाल की जाये

3. फिर दोनों गट्टों समेत हाथों पर मलें और उँगलियों का खिलाल करें

4. फिर बाएं हाथ में लोटा वगैरह लेकर दाहिने हाथ पर उँगलियों की तरफ से शुरू करके गट्टे तक तीन बार पानी बहाया जाए

5. फिर बाएं हाथ पर उँगलियों की तरफ से शुरू करके गट्टे तक तीन बार पानी बहाएं इसका ख़्याल रहे कि उँगलियों की घाइयां पानी बहने से न रह जाए।

6. फिर तीन बार कुल्ली करें इस तरह कि मुँह की तमाम जड़ों और दाँतों की सब खिड़कियों में पानी पहुंच जाये कि वजू में इस तरह कुल्ली करना सुन्नतें मुअक्किदा है और गुस्ल में फ़र्ज़ है।

7. अगर रोज़ादार न हो तो हर कुल्ली गरगरह के साथ करें,

8. फिर नाक में अगर रीठ लगी हो तो बाएं हाथ से साफ़ करके सांस की मदद से तीन बार नर्म बासों तक पानी चढ़ाये ताकि कोई बाल धुलने से बाक़ी न रहे

9. फिर चेहरा पर अच्छी तरह पानी मलकर इसको तीन बार इस तरह धोएं कि एक कान की लौ से दूसरे कान की लौ तक, पेशानी के ऊपर कुछ सर के हिस्से से ठोड़ी के नीचे तक हर हिस्से पर पानी बह जाये अगर दाढ़ी हो तो इस तरह ख़िलाल करें कि उँगलियों को गर्दन की तरफ से दाख़िल करें और सामने निकाले और उसके बाल और खाल पर भी पानी बहाए

10. फिर दोनों हाथों पर पानी मलकर पहले दाहिने हाथ पर भी सर नाखून से शुरू करके निस्फ़ बाजू तक तीन बार पानी बहायें,

11. फिर सर का मसह इस तरह करें कि दोनों हाथों के अंगूठे और कलिमे की उंगलियां छोड़कर बाक़ी तीन-तीन उँगलियों के सिरे मिलाकर पेशानी के बाल उगने की जगह पर अगर बाल हो वरना इसको खाल पर रखें और सर के ऊपरी हिस्से पर गुद्दी तक इस तरह ले जाएँ कि हथेलियाँ सर से जुदा करें

12. फिर वहां से हथेलियों से सर के दोनों करवटों का मसह करते हुये पेशानी तक वापस लाएं।

13. उसके बाद कलिमे की उँगलियों के पेट से कान के अंदरूनी हिस्सा का मसह करें और अंगूठे के पेट से कान की बैरूनी सतह का मसह करें और उन्ही उँगलियों की पुश्त से सिर्फ गर्दन का मसह करें

14. फिर पानी से दोनों पांव मले और इस तरह ख़िलाल करें कि बायें हाथ की छंगुलियाँ से दाहिने पांव की छंगुलिया से शुरू करके अंगूठे पर ख़त्म करें और बायें पांव में अंगूठे से शुरू करके छंगुलिया पर ख़त्म करें और दाहिने बाएं पांव पर उँगलियों की तरफ से आधी पिंडली तक हर बाल और हर हिस्साए-ख़ास पर तीन-तीन बार पानी बहाएं | (मुक़म्मल निज़ामें शरीअत)

Namaz rakat

namaz me kitni rakat

आपको ये पतई है 5 वक्त की नमाज पड़ी जाती है, जिसमे टोटल 48 rakat होती है, अब मे आपको बताने वाला हु की हर 1 नमाज के अंदर कितनी rakat होती है,

फ़जर :- मे 4 rakat hoti है,

  • 2 सुनत 2 फर्ज

जौहर :- मे 12 rakat होती है,

  • 4 सुनत 4 फर्ज 2 सुनत 2 नुफल

असर :- मे 8 rakat होती है,

  • 4 सुनत 4 फर्ज

मगरीब :- मे 7 rakat होती है,

  • 3 फर्ज 2 सुनत 2 निफाल

ईसा : मे 17 rakat होती है,

  • 4 सुनत 4 फर्ज 2 सुनत 2 निफाल 3 वितर 2 सुनत

जुम्मा :- मे 14 rakat होती है,

  • 4 सुनत 2 फर्ज जुम्मा 4 फर्ज नमाज 2 सुनत 2 निफाल

Namaz केसे पढे

Namaz padhne ka tarika

नमाज़ पढ़ने का आसान तरीक़ा नमाज़ पढ़ने का तरीका यह है कि बावजू क़िब्ला की तरफ मुँह करके इस तरह खड़ा हो कि दोनों पंजों में चार अंगल का फ़ासिला हो और नमाज़

अंगूठे कान की लव से छू जायें |

बाक़ी उंगलियां अपने हाल पर रहें न बिल्कुल मिली न बहुत फैली और हथेलियां क़िब्ले की

तरफ हो और निगाह सज़्दा की जगह पर हो __ और जिस वक़्त की जो नमाज़ पढ़नी हो दिल में

उसका पक्का इरादा करके अल्लाहु अक़बर कहता हुआ हाथ नीचे ला कर नाफ के नीचे बाँध लें इस तरह दाहिनी हथेली की गद्दी बाएं कलाई के सिरे पर हो और बीच की तीनों उंगलियां बाएं कलाई की पीठ पर और अंगूठा और छोटी उंगली कलाई के अगल-बगल हो और सना पढ़ें

“सुबहा-न-क अल्लाहुम्मः व बिहम्दि-क-वतबा-र-कस्मु क-व तआला जद्-दो-क-व लाइला-ह-गैरु-क०”

फिर तअव्वुज़ पढ़ें

अऊजू बिल्लाहि मिनश्शैतानिर-रज़ीम” फिर तस्मीयह” बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम”

फिर अल्हम्द शरीफ़ पूरी पढें और ख़त्म पर आहिस्ता से आमीन कहे इसके बाद कोई सूरत या तीन आयतें पढ़ें या ऐसी एक आयत पढ़ें जो तीन छोटी आयतों के बराबर हो।

फिर अब अल्लाहु अकबर कहता हुआ रुकूअ में जाएँ और घुटनों को हाथ से पकड़े इस तरह कि हथेलियाँ घुटने पर हो और उंगलियां खूब फैली हो और पीठ बिछी हो और सर पीठ के बराबर हो ऊँचा-नीचा न हो और नज़र पांव की तरफ हो और कम से कम तीन बार “सुबहानः रब्बियल अज़ीम” कहें,

फिर समिअल्लाहु लिमन हमिदह कहता हुआ सीधा खड़ा हो जाएँ और जो मुनफ़रिद यानी (अकेला) हो तो इसके बाद अल्लाहुम्मः रब्बना व लकल हम्द कहें

फिर अल्लाह अकबर कहता हुआ सज़्दा में जाये इस तरह की पहले घुटना ज़मीन पर रखें फिर हाथ फिर दोनों हाथो के बीच सर रखें इस तौर पर कि पहले नाक तब माथा और नाक की हड्डी ज़मीन पर जम जाए और नज़र नाक की तरफ रहे और बाजुओं को करवटों से और पेट को रानो से और रानो को पिण्डलियों से जुदा रखें और दोनों पाव की सब उँगलियों को क़िब्ला की तरफ रखे इस तरह कि उँगलियों का सारा पेट ज़मीन पर जमा रहे हर पांव की कम से कम तीन उंगलियों का पेट लगना वाजिब है और हथेलियां बिछी हों और उंगलियां क़िब्ला की तरफ हो और कम से कम तीन बार सुबहानः रब्बियल आला”कहे

फिर सर उठाये इस तरह कि पहले माथा फिर

नाक फिर मुँह फिर हाथ फिर दाहिना क़दम खड़ा __ करके उसकी उंगलियां क़िब्ला रुख करें और

बायां क़दम बिछाकर रानों पर घुटनो के पास रखें कि दोनों हाथ की उंगलियां क़िब्ला को हों और उँगलियों का सिरा घुटनों के पास हो फिर ज़रा सा ठहर कर “अल्लाहु अकबर” कहता हुआ दूसरा सज़्दा करे यह सज़्दा भी पहले की तरह करें फिर सर उठायें और हाथ को घुटनों पर रखकर पंजों के बल खड़ा हो जाएँ उठते वक़्त बिला उज़ हाथ ज़मीन पर न टिके यह एक रक़अत पूरी हो गयी । अब फिर

पढ़कर “अल्हम्दु” और सूरत पढ़ें और पहले की तरह रुकूअ और सज़्दा करें फिर जब दूसरे सज़्दा से सर उठायें तो दाहिना क़दम खड़ा करके बायां क़दम बिछाकर बैठ जाए और तशह्हुद पढ़ें

“अत्तहियातु लिल्लाहि वस्स-ल-वातु वत्तय्यिबातु अस्सलामु अलै-क अय्युहन्नबियो रहमतुल्लाहि व ब-र-कातुहू अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस्-सालिहीन अशहदु अल्लाइला-ह इल्लल्लाहु व अशहदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहु व रसुलहू०” जब कल्मये ला के क़रीब पहुंचे तो दाहिनी हाथ की बीच की उंगली और अंगूठे का हल्का बनाये

और छोटी उंगली और उसके पास वाली को हथेली से मिला दें और लफ़्ज़े ला पर कलिमा की उंगली उठायें मगर इधर उधर न हिलाएं और “इल्ला ” पर गिरा दें

और सब उंगलियां फ़ौरन सीधी कर लें | अब अगर दो से ज़्यादा रक़अते पढ़नी हो तो उठ खड़ा हों और उसी तरह पढ़ें मगर फ़र्ज़ की उन रकअतों में (अल्हम्द) के साथ सूरह मिलाना ज़रूरी नहीं अब पिछले क़ाअदा जिसके बाद नमाज़ ख़त्म करेगा उसमे तशह्हुद के बाद दुरुद शरीफ पढ़ें

“अल्लाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मदिव्आ-व अला आलि मुहम्मदिन कमा सल्लै-त अला इब्रॉही-म व अला आलि इब्राही-मः इन्न-क हमिदुम-मजीद० अल्लाहुम्म बारिक़ अला मुहम्मदिव-व अला आलि मुहम्मदिन कमा बारक-त आला इब्राही-मः व अला आली इब्राही-मः इन्न-क हमीदुम-मजीद०”

फिर यह दुआ पढ़ें

“अल्लाहुम्मग़ फिरली व लि वालिदय्य व लिमन तवालि-दः व लि जमीइल मुअ मिनीनः वल मुमिनाति वल मुस्लिमी-नः वल् मुस्लिमातिल अह-याए मिनहम वल अम्वाति इन्न-क मुजीबुद् दाअवाति बिरह-मति-क या अर-हमर राहिमीन०”

या और कोई दुआएं मासूरह या यह पढ़ेंअल्लाहम्मः रब्बना आतिना फिद-दुनिया हस-न-तव व फिल आखि-रति-ह-स-नतंव वकिना अज़ाबन्नार०

और इसको बगैर अल्लाहुम्म के न पढे फिर दाहिने शाने की तरफ मुँह करके “अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह” कहें और इसी तरह

और इसको बगैर अल्लाहुम्म के न पढ़े फिर दाहिने शाने की तरफ मुंह करके “अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह” कहें और इसी तरह बायीं तरफ | अब नमाज़ ख़त्म हो गयी इसके बाद इमाम दाएं-बाएं या मुक़्तदी की तरफ मुँह करके दुआ करें।

“अल्लाहुम्म अन्तस्सलाम व मिन् कस्सलाम तबारक़-त या जल जलालि वल इकरामि रब्बि अ इन्नी अला ज़िक्-रि-व हुस्ने इबादतिक रब्बना तक़ब्बल मिन्ना इन्न-क अंतस्मीउल अलीम व तुब अलैना इन्न-क अन्तत्तव्वाबुररहीम रब्बना आतिना फिद्-दुनिया ह-स-न तंव व फिल आख़िरति ह-स-न तंव व किना अज़ाबन्नार०”

Final word

आज की पोस्ट में “namaz padhne ka tarika की पूरी जानकारी हिंदी में”, इस बेहतरीन जॉब पोर्टल के बारे में आपको पूरी जानकारी मिली है। उसी समय, आपने यह भी सीखा कि इस पोर्टल का सही उपयोग कैसे किया जाए।

अगर आप हिंदी में namaz padhne ka tarika की तलाश कर रहे हैं तो आपको उन सभी चीजों के बारे में जानकारी मिल जाएगी जो आप इसमें खोज रहे हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि एक स्थान पर इतनी जानकारी होने से आपको अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलती है और आपका समय बर्बाद नहीं होता है।

यदि आपको इस लेख के बारे में कोई संदेह है या आप चाहते हैं कि इसमें कुछ सुधार होना चाहिए, तो इसके लिए आप नीचे टिप्पणी लिख सकते हैं।

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